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बहुत समय पहले की बात है। हरे-भरे पहाड़ों, नीले आसमान और रंग-बिरंगे फूलों से घिरे एक छोटे से गाँव का नाम था सूरजपुर। यह गाँव शांत, सुंदर और खुशहाल था। गाँव के लोग मेहनती थे और एक-दूसरे की मदद करते थे। इसी गाँव में रहता था एक नन्हा, समझदार और बहादुर कुत्ता, जिसका नाम था टॉमी।
टॉमी कोई साधारण कुत्ता नहीं था। उसकी आँखों में चमक थी, कान हमेशा चौकन्ने रहते थे और उसका दिल बहुत बड़ा था। वह पूरे गाँव का प्यारा था। बच्चे उसके साथ खेलते, बुज़ुर्ग उसे प्यार से रोटी खिलाते और किसान उसे अपना साथी मानते थे।

टॉमी का सबसे अच्छा दोस्त था एक छोटा लड़का — राहुल। राहुल बहुत नेक दिल और समझदार था। वह हर दिन स्कूल से आने के बाद टॉमी के साथ खेतों में खेलता, नदी के किनारे बैठता और उससे अपनी सारी बातें साझा करता।
राहुल अकसर कहता,
“टॉमी, काश हमें कोई खज़ाना मिल जाए, जिससे हम गाँव की मदद कर सकें।”
टॉमी उसकी बातें ध्यान से सुनता और पूँछ हिलाकर जैसे कहता — “एक दिन ज़रूर!”
एक दिन गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे राहुल को एक पुरानी सी बोतल मिली। बोतल के अंदर एक पुराना नक्शा था। नक्शा बहुत पुराना लग रहा था और उस पर अजीब निशान बने थे।

राहुल उत्साहित होकर बोला,
“टॉमी! ये देखो! शायद ये खज़ाने का नक्शा है!”
टॉमी ने नक्शे को सूँघा, उसकी आँखें चमक उठीं। उसे महसूस हुआ कि यह कोई साधारण कागज़ नहीं है।
नक्शे पर लिखा था:
“जो सच्चे दिल और साहस से भरा हो, वही खज़ाने तक पहुँचेगा।”
अगली सुबह राहुल और टॉमी ने यात्रा शुरू की। उन्होंने अपने साथ थोड़ा खाना, पानी और एक टॉर्च रखी। नक्शे के अनुसार उन्हें काले जंगल से होकर जाना था।
जंगल घना और डरावना था। बड़े-बड़े पेड़, अजीब आवाज़ें और अंधेरी पगडंडियाँ थीं। राहुल थोड़ा डर गया, लेकिन टॉमी उसके आगे-आगे चल रहा था।
अचानक झाड़ियों से आवाज़ आई।
टॉमी भौंकने लगा और राहुल के सामने खड़ा हो गया।
वहाँ से एक घायल हिरण निकला।
राहुल ने उसकी मदद की और उसके घाव पर पट्टी बाँधी।
तभी नक्शे का पहला निशान चमक उठा।
नक्शे पर नए शब्द उभरे:
“दया ही पहला रास्ता है।”
राहुल समझ गया — खज़ाना सिर्फ सोने-चाँदी का नहीं, बल्कि अच्छाई का भी है।
आगे उन्हें एक तेज़ बहती नदी मिली। पुल टूटा हुआ था। राहुल सोच में पड़ गया।
तभी टॉमी ने पास पड़ी लकड़ियों को इकट्ठा किया और पूँछ हिलाकर राहुल को संकेत दिया।
दोनों ने मिलकर एक छोटा सा पुल बनाया और सुरक्षित नदी पार की।
नक्शा फिर चमका।
“मिलकर किया गया काम कभी असफल नहीं होता।”
यात्रा के अंत में वे एक पहाड़ी गुफा के सामने पहुँचे। गुफा के अंदर अंधेरा और सन्नाटा था। राहुल का दिल तेज़ धड़कने लगा।
टॉमी ने धीरे से उसका हाथ खींचा और आगे बढ़ा।
गुफा के अंदर एक पत्थर की संदूक रखी थी। उस पर लिखा था:
“लालच करने वाला खाली हाथ लौटेगा।”
राहुल ने संदूक खोली। अंदर सोने के सिक्के, हीरे और साथ में एक पत्र था।
पत्र में लिखा था:
“जो इस खज़ाने तक पहुँचा है, उसने साहस, दया और दोस्ती दिखाई है। यही असली खज़ाना है।”
राहुल ने फैसला किया कि वह इस धन का उपयोग गाँव की भलाई के लिए करेगा।
खज़ाने से गाँव में स्कूल बना, अस्पताल खुला और कुएँ बनाए गए। गाँव फिर से खुशहाल हो गया।
टॉमी अब पूरे गाँव का नायक बन गया।
बच्चे कहते,
“अगर टॉमी न होता, तो हमें खज़ाना कभी नहीं मिलता।”
टॉमी और राहुल ने सिखाया कि:
- सच्चा खज़ाना दोस्ती है
- दया और मदद सबसे बड़ी ताकत है
- लालच नहीं, नेक इरादे सफलता दिलाते हैं
शाम को राहुल और टॉमी पहाड़ी पर बैठकर सूरज को डूबते देखते।
राहुल मुस्कुराकर बोला,
“टॉमी, तुम सिर्फ दोस्त नहीं, मेरा सबसे बड़ा खज़ाना हो।”
टॉमी ने खुशी से पूँछ हिलाई।
और इस तरह “ (टॉमी और खजाना)” की कहानी हमेशा के लिए अमर हो गई।

